Wednesday, 18 October 2017

पहचान

खुद की पहचान

सदियों से लोग बस दुसरो की तरह बनने की कोशिश करते हैं।

लोग कहते है इनकी तरह बनो इनकी तरह बनो।
आखिर कोई ये क्यों नहीं कहता अपनी तरह बनो।।

हम सब में एक हुनर होता है।
जो हम दुनिया से छिपा कर रखते हैं।।

किसी को बताने से डरते हैं।
की शायद कहीं ये हुनर मेरा मज़ाक न बना दे।।

पर इतना आसान नहीं होता है खुद के हुनर को छुपाना।
कभी न कभी वो सामने आ ही जाता है।।

हम इस दुनिया से नहीं खुद से डरते हैं।
डरते हैं कहीं हमारा हुनर हमे गिरा न दे।।
पर ये भूल जाते है कि गिर कर सँभालने वालो की ही जीत होती है।।

कभी कभी ऐसा लगता है कि हम दुनिया की भीड़ में खुद को ही खो चुके हैं।।

दुसरो की तरह बनने की फ़िराक में खुद का ही गला घोंट चुके हैं।।

दुनिया की भीड़ में खुद को साबित करते करते अपनी ही पहचान खो चुके हैं।।

अपनी खोई पहचान को वापिस पाने के लिए हुनर बाहर लाओ।
दुनिया को फ़क्र से अपना हुनर दिखाओ।।

शायद तब इस दुनिया को तुमपर नाज़ होगा।
शायद तुम्हें खुद पर फ़क्र होगा।।

    Be lyk u ..
   Be in itself😘😘😘

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