Wednesday, 8 November 2017

याद

जैसे जैसे वक़्त बीत रहा है।
तुम्हारे जाने का समय नज़दीक आ रहा है।।

हो सकता है ये जाने वाला वक़्त तुम्हे हमसे दूर कर दे पर हमारे दिलों में तुम हमेशा रहोगी इस घर की बेटी बन कर मेरी बहन बन कर।।

तुमसे लड़ते झगड़ते चीखते चिल्लाते ये वक़्त तो बीत गया पर जो नहीं बीतेगा वो है हमारा साथ हमारा प्यार।।

याद आएगा तुमसे वो लड़ना झगड़ना।
तुम्हे याद दिलाना की तुम्हे जल्दी जाना है😛

तुम्हे परेशान करना और तुमसे रात के वक़्त लड़ना की ये मेरी साइड है वो तुम्हारी साइड है।।

तुम्हे बोलना ज्यादा ऊड़ो मत गावँ में है तुम्हारा ससुराल।।

भाभी के साथ मिलकर तुम्हे टीस करना तुम्हे तंग करना।।

वो तुम्हारा कोई राज़ जानकर मेरा तुम्हे और तुम्हारा जान कर मुझे ब्लैकमेल करना याद आयेगा।।

उन कपड़ो को लेकर लड़ना जो हम लोग एक दूसरे का पहन लिया करते थे याद आएगा।।

याद आएगा तुम्हारा सबकुछ।।
सब मेरा होगा फिर भी वो ख़ुशी न होगी जो तुमसे छीन कर लेने में होती थी।।

सब याद आएगा और ये वक़्त ये यूँ ही गुजर जायेगा।।
यूँ ही गुजर जायेगा।।

No comments:

Post a Comment

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।