पता नहीं क्यों आज जब घर गयी काफी दिनों बाद तो माँ ने बताया कि पापा मेरे लिए लड़का देख रहे हैं। मैंने तपाक से बोला, "माँ पापा को बोलो अभी टाइम है इतनी जल्दी आप दोनों का पीछा नहीं छोडूंगी मैं। अभी तो छोटी हूँ मैं। इतनी जल्दी कौन शादी करता है भाई?? नहीं नहीं बोल दो आप पापा को अभी शादी के लिए न सोचें अभी मुझे कुछ अच्छा करना है अभी तो अपने सपनों को उड़ान देनी है अभी तो खुद की बुक लिख कर पब्लिश करनी है।। और तो और पीएचडी करना है बहुत कुछ है अभी।। अभी नहीं नो शादी।"
तभी पापा ने ये बात सुन ली और वो पास आकर बोले , " अरे ये सब शादी के बाद कर लेना।। क्या लड़कियां शादी के बाद पढाई नहीं करती क्या। तुम चिंता मत करो। लड़का वैसे मैंने देखा अच्छा है आर्मी में इंजीनियर है उसके साथ तो तुम देश भ्रमर में रहोगी।। "
तभी मैंने उनको बोला, " अगर उसने शादी के बाद पढ़ने न दिया तो क्या गारन्टी है कि वो शादी के बाद मेरे सपनों को पंख देने में मदद करेगा क्या गारंटी है कि वो सब करने देगा जो मैं अभी कर रही हूँ?" इसी बीच मेरी बात काटते हुए उन्होंने तपाक से कहा, " तुम चिंता मत करो वो सब करने देगा तुमको। तुम बस शादी के लिए हाँ कर दो।" ये फरमान देकर वहां से चले गए पापा।
पर उन्होंने पीछे एक सवाल छोड़ दिया क्या सच में ज़िन्दगी में शादी ही सब कुछ होता है? क्या लड़कियों की ज़िन्दगी शादी पर ही ख़त्म हो जाती है? क्या सच में हम एक ज़िम्मेदारी ही हैं? क्या सच में लाइफ का और कोई मोटिव नहीं? क्या सच में...?? एक बड़ा सवाल है शायद खुद से भी परिवार से भी और शायद दुनिया से भी।।A question to yourself and society too
तभी पापा ने ये बात सुन ली और वो पास आकर बोले , " अरे ये सब शादी के बाद कर लेना।। क्या लड़कियां शादी के बाद पढाई नहीं करती क्या। तुम चिंता मत करो। लड़का वैसे मैंने देखा अच्छा है आर्मी में इंजीनियर है उसके साथ तो तुम देश भ्रमर में रहोगी।। "
तभी मैंने उनको बोला, " अगर उसने शादी के बाद पढ़ने न दिया तो क्या गारन्टी है कि वो शादी के बाद मेरे सपनों को पंख देने में मदद करेगा क्या गारंटी है कि वो सब करने देगा जो मैं अभी कर रही हूँ?" इसी बीच मेरी बात काटते हुए उन्होंने तपाक से कहा, " तुम चिंता मत करो वो सब करने देगा तुमको। तुम बस शादी के लिए हाँ कर दो।" ये फरमान देकर वहां से चले गए पापा।
पर उन्होंने पीछे एक सवाल छोड़ दिया क्या सच में ज़िन्दगी में शादी ही सब कुछ होता है? क्या लड़कियों की ज़िन्दगी शादी पर ही ख़त्म हो जाती है? क्या सच में हम एक ज़िम्मेदारी ही हैं? क्या सच में लाइफ का और कोई मोटिव नहीं? क्या सच में...?? एक बड़ा सवाल है शायद खुद से भी परिवार से भी और शायद दुनिया से भी।।A question to yourself and society too

Tu khud ki khoj me nikl tu kisliye hatash ..Tu chal tere vajood ki samay ko bhi talash h..✌
ReplyDeleteकहानी जो भी हो...दावत में हम भी आएंगे।
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