Wednesday, 28 February 2018

नाराज़ नहीं था मैं, बस दूर जाना चाहता था मैं।

उसने पूछा मुझसे, "नाराज़ था मैं... आयी क्यों नहीं मनाने। ऐसा क्या हो गया था?"
मैंने बोला, "नाराज़ थी मैं भी तुमसे। क्यों बेवजह रूठा था तू?"
"नाराज़ नहीं था मैं बस जाना चाहता था कुछ दिन के लिये तुमसे दूर।"उसने बोला।
"क्यों आखिर क्या कर दिया मैंने? कौन सा गुनाह कर था मैंने? किस गलती की सजा थी वो?" रोते हुए पूछा मैंने।
"तुम करती ही कहाँ कुछ हो। सारी गलती तो मेरी होती है न। तुम तो एकदम सीधी साधी हो मोम जैसी सीधी।" उसने गुस्से में कहा।
"पहेलियां मत बुझाओ सच सच बताओ।" झल्ला कर पूछा मैंने।
"ठीक तो सुनो मत रखा करो मेरा इतना ख्याल। न किया करो मुझे इतना प्यार। इस प्यार की आदत नहीं है मुझे। पता है कितनी आदत हो गयी थी मुझे तुम्हारी, तुम्हारे एक दिन भी कॉल या मैसेज न करने पर कितना परेशान हो जाता था मैं। इसीलिये दूर चला गया था मैं। मत करो इतना प्यार मुझे।" उसने मुझे झकझोरते हुए बोला।
"बस इतनी सी बात। पता है तुम्हे मेरी केअर करना नहीं पसंद है पर ये हक़ है मेरा जो तुम हमसे नहीं छीन सकते। और तुम्हारे सिवा मेरा है ही कौन। तुम चले गए तो मर जाऊंगी मैं। दोबारा ऐसा कभी मत करना।" मैंने अपने आंसू पोछते हुए मुस्कुरा कर कहा।
"शशश.. दोबारा ऐसा कभी मत बोलना। बहुत प्यार करता हूँ तुमसे। नहीं करूँगा कभी ऐसा। आई लव यू।" उसने मुझे गले लगाते हुए कहा।
"आई लव यू टू।" गले लगते हुए कहा मैंने।

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