Friday, 23 March 2018

यादों का पिटारा


# Happy_Poetry_Day
आज शाम जब मैं कॉलेज से आ रही थी।
फिर उसका मुस्कुराता चेहरा देखा।।

उसके दिल की धड़कनों को सुना।
तो लगा शायद आज भी ये मेरे लिए ही धड़कती है।।
फिर उस मुस्कान मे उन दिनों की यादों में खो गयी।

जब हम पहली बार मिले थे।।
जब उसका खुशनुमा चेहरा पहली बार इन आँखों के सामने आया था।

दुनिया की भीड़ मे सबसे अलग उसका ही मुस्कान दिखा।।
शायद। शायद तभी ये दिल उसका हो बैठा।।

हम मिले, बातें की,
साथ बिताया पल अचानक यूँ ही याद आ गया।।

दिल फिर उन गलियों को दौड़ा जिन गलियों में हम साथ वक़्त बिताते थे।।
आज फिर अचानक दिल पूछ बैठा "क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आती? साथ बिताया वो पल याद नहीं आता? याद नहीं आती वो कसमें वो वादे?"

तब उसके दिल का जवाब आया "याद आता है सब कुछ.. पर कह नही सकता.. नहीं कह सकता कि कितना डरता था मैं तुम्हे खोने से।"

फिर इस दिल को उन आँखों में झूठ नज़र आया जो पहले बोला करता था।।
आज भी उन आँखों में मेरा नामोनिशां नहीं नज़र आया।।

दिल फिर कह उठा आज भी वो तुझे प्यार नहीं करता जैसा तू उससे करती है।
जैसा तू उससे करती है।।।

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