Wednesday, 13 June 2018

एक खत पिता के नाम

डिअर पापा एक चिट्ठी आपके नाम।
कुछ बातें हैं जो हम पिता से सीधे नहीं कह सकते।
होती हैं कुछ चीज़ें जिन्हें कहने को डरता है मन।। हाँ ऐसा ही कुछ समझ लीजिए कि उनका सम्मान या फिर डर ही रहता है।। पापा हमेशा अपने बच्चों से कहते हैं कि अब तुम बड़े हो गए हो अच्छे बुरे का ख्याल खुद रख सकते हो तुम। पर ऐसा नहीं है कि हमें अब आपके गाइडेन्स की जरूरत नहीं है। आज भी हम बच्चे आपके लिए उतने ही छोटे हैं जितना आप मानते हैं। आपके गाइडेन्स आपके प्यार की हमेशा ही ज़रूरत रहती है हम सबको।।
आप जब गुस्से में आँख दिखा देते हैं न तो डर जाते हैं हम सब पर तब एक ही ख्याल आता है जैसे शिवी आपके आँख दिखाने या डांटने से आपसे चिपक जाती है न वैसे ही हम भी लिपट जाएँ।
हां थोड़ी ज़िद्दी भी हूँ मैं क्योंकि इतना जानती हूँ मैं की मेरी हर ज़िद को सिर्फ और सिर्फ आप पूरा कर सकते हैं उसके अलावा और कोई भी नहीं।।
हाँ कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो हम सब सिर्फ मम्मा को बताते हैं क्योंकि मम्मा डाकिया जो हो जाती हैं हमारी हर बात आप तक चली ही जाती है बिना कुछ कहे।।
और कितने ही ऐसे सीक्रेट्स हैं जो मैंने सिर्फ अपने इस दोस्त को बताए हैं हां पापा सिर्फ आपको।।
कुछ खट्टी मीठी सीक्रेट्स भी हैं जो मैंने शेयर सिर्फ आपसे किये हैं।।
जब कभी आप बैठे रहते हैं और मैं आपसे गले लगती हूँ कभी पीछे से तो आप पूछते हैं क्या हुआ कोई काम है क्या बेटा?? और मैं बोलती हूँ नहीं पापा।। सच में पापा वो मेरे प्यार जताने का तरीका ही होता है।
कितनी ही सारी छुटपन की यादें भी हैं जो आपसे और हमसे जुडी हैं सिर्फ। हाँ कुछ यादें दिल में ही रहें तो बेहतर होता है पर कुछ यादें मैं शेयर करूँ क्या? यूँ तो मुझे बचपन की बहुत सारी बातें याद नहीं है क्योंकि छोटे थे न तो माँ बोलती हैं कि हम ज्यादा शरारती नहीं थे तो बदमाशी वाली यादें नहीं है शायद।।
पर मुझे आज भी याद है एक बात जब मेरा चेहरा जला था उस दिन ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ था मेरे चेहरे पर लेकिन आप अपनी एक जरुरी मीटिंग छोड़ कर आये थे मेरे पास।। उस वक़्त लगा था कि शायद मैं ही आपकी दुनिया हूँ। पर बुरा भी लगा था कि आप मेरी वजह से मीटिंग छोड़ आए।
पता है पापा हम भाई बहन कभी कह नहीं पाते पर हम चारों ही आपसे बहुत प्यार करते हैं। हाँ हमारे जताने का अंदाज़ थोड़ा अलग है लेकिन प्यार सच्चा वाला है।।
इतना जानती हूँ कि आप जिस तरह से हमारी ख्वाहिशों को पूरा करने में जी जान लगा देते हैं न वो और कोई भी नहीं कर सकता।
हर पिता अपने बच्चों के लिए कुछ खास करते हैं अपने अंदाज़ से प्यार जताते हैं।।
आपने ने जितना किया है मेरे लिए उसका मोल शायद मैं कभी न चुका पाऊं।
खैर चिट्टी ज्यादा लंबी हो गयी तो आपको भी सुनने में बोर लगेगा। तो अब मैं अलविदा लेती हूँ और जाते जाते ये जरूर कहना चाहूंगी "we love you papa" "happy father's day"

1 comment:

  1. बहुत ही मार्मिक लिखा है अन्नू।
    शाबाश😘❤️❤️

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मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।