देखो देखो बाहर ये शोर कैसा हो रहा है।
मेरे घर दो नन्हें क़दमों का आगमन हो रहा है।।
कुछ इसी तरह के पोस्ट मैंने दो साल पहले आज ही के दिन अपनी खुशी को ज़ाहिर करने के लिए डाली थी। खुश होती भी क्यों न आखिर पहली बार बुआ बनी थी वो भी एक लड़की की। मेरी हमेशा से एक चाह थी की भाई को लड़की हो जो मेरे बाद इस घर को संजो कर रखेगी। वैसे ही खुशियां बिखेरेगी जैसे हम और दी बिखेरा करते हैं। हुआ भी कुछ ऐसा ही भगवान ने मेरी सुन ली और ठीक 11 बजकर 47 मिनट रात्रि में हमारी भतीजी का जन्म हुआ। मैं घर पर अकेली थी क्योंकि कब किस चीज़ की ज़रूरत पड़े उसे भेजने के लिए उसके लिए हमे घर रहना ही उचित लगा था। तभी मम्मी का फोन आया और ये खुशखबरी मिली। मैं तो जैसे नाचने ही लगी थी, पूरे घर को सर पर उठा लिया था मैंने उस दिन। चाचा चाची को बताया और रात के ठीक 12 बजे हम अस्पताल पहुँच गये। फिर 1 बजे तक बाबू मेरे हाथों में थी। उसको लेकर ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया ही हाथ में आ गयी हो। वो नन्हे से हाथ, गुलाबी होंठ, आँखें भींच कर बंद हुई और माथे पर लाल निशान। उस वक़्त उसे देखने के लिए सबका ताँता लगा हुआ था। वो सावन में हुई थी और हम लोग ठहरे भोले के भक्त तो रख दिया उसका नाम शिवी। फिर वो घर आई और धीरे धीरे बड़ी होने लगी। दी की शादी का दिन भी आ गया जब वो सिर्फ 5 महीने की थी। उसकी आंखें तो बस एकटक लाइट को ही देखती रहती। फिर दी विदा हो गयी। सब कुछ पहले जैसा हो गया। फिर वो बड़ी होने लगी साथ में उसकी बदमाशियां भी। कहने को लड़की थी वो जिसे शांत और सजल कहा जाता है, पर वो?? उफ्फ!! उसकी सारी हरकतें, लड़को वाली कभी रिमोट फेंकना, कभी सब्जी किचन से उठाकर बेड पर रखना तो कभी खिलौनों को खेलने से ज्यादा तोड़ देना।
फिर आया उसका पहला जन्मदिन। अब तक तो वो सबको जानती है पहचानती है। वो खुद बड़ी हुई साथ ही उसकी बदमाशियां भी। अपनी दादी से तो उसका छत्तीस का आंकड़ा रहा है हमेशा से। कभी उनको मारना, कभी दांत काटना तो कभी बाल नोचना। पर उस दिन वो थोड़ी शांत सी थी उसके चेहरे को देख कर उसके शांत होने की वजह कोई भी आसानी से जान जाता। क्योंकि चौबीस साल बाद कोई लड़की पैदा हुई है। या ये कहें कि घर में किलकारी गूंजी थी। तो उसके पहले जन्मदिन पर रामायण उसके बाद बड़ी सी पार्टी का आयोजन था। उस दिन वो इतने सारे लोगों को देखकर शांत थी। उसकी शांति को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि ये रोजाना वाली लड़की है। जो पूरा घर सर पर उठाए रहती है। उसके दादू, पापा, मम्मा, छोटी बुआ, दादी सब तैयारियों में थे। उसकी बड़ी बुआ नहीं आ पाई थी कुछ दिक्कतों की वजह से लेकिन हाँ उन्होंने उसके फूफाजी के हाथों खूब सारा खिलौना और अपना प्यार भेजा था। जो उसके लिए ज्यादा कीमती था। फिर नाना नानी का लाया तोहफा भी उसके लिए खास ही था आखिर ननिहाल से जो आया था। धीरे धीरे पार्टी ख़त्म हुई और सब मेहमान चले गए। और वो फिर अपनी दिनचर्या में बिजी हो गयी।
इतने दिनों में कुछ नहीं बदला था सिवाय एक चीज़ के वो थी उसकी बातें अब वो दादी अम्मा जैसे टिपिर टिपिर बोलने लगी थी। जैसे मुझे वीडियो कॉल करके कहना "बुआ इतनी सारी चोकलेट लाना, बुआ लॉलीपॉप ले आना, बुआ मम्मी मारी" जैसी बातें अब वो साफ़ बोलने लगी थी। अगर कोई उसे गलती से भी डांट दे तो मज़ाल वो बच जाए सीधा दादू के पास दौड़ लगाती है और शिकायत कर आती है सिर्फ शिकायत ही नहीं दादू को खींचते हुए लाती है और मारने को कहती है। आज मेरी उसी गुड़िया का दूसरा जन्मदिन है समझ नहीं आ रहा है कि क्या दूँ उसे। खिलौने या कपड़े? कपड़ों से याद आया उसके पास 200 से भी ज्यादा कपडे होंगे फिर भी कोई भी बाहर जाता है तो उसके लिए कपडे ज़रूर लेकर आता है। जिसको लेकर उसकी मम्मी हमेशा नाराज़ हो जाती है। हो भी क्यों न नए कपड़ों के चक्कर में पुराना रह जाता है। इस बार भी उसकी छोटी बुआ ऐसा ही कुछ लेगी कपडे और खिलौने तो पक्का ही लेगी। हां उसकी मम्मी की डांट भी मिलेगी पर ले लेगी। आखिर घर की रौनक का दूसरा जन्मदिन जो है।
Hii! I am Anupriya Agrahari from Kanpur, Uttar Pradesh. You will get all types of article here.. :-)
Friday, 7 June 2019
रौनक का जन्मदिन
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