Showing posts with label पत्ते ज़िन्दगी दुश्मन जान डाल. Show all posts
Showing posts with label पत्ते ज़िन्दगी दुश्मन जान डाल. Show all posts

Monday, 26 February 2018

सूखे पत्ते

सूखे पत्तों सी हो गयी है ज़िन्दगी मेरी।
जो भी आता है कुचल कर चला जाता है।।
और फिर यही कहता है "सूखे पत्ते ही तो थे।"

अब उनको कैसे बताऊँ की इस सूखे पत्तों मे भी जान है थोड़ी।
इसकी भी पहचान बाकि है थोड़ी।।

सूखे पत्ते भी कहते हैं मत कुचलो मुझे माना कि डाल से टूट चुका हूँ पर अभी भी मुझ में थोड़ी जान बाकि है।।

सूखे पत्तों की भी किस्मत होती है दोस्तों जिसका कोई मोल नहीं।।

यही सूखे पत्ते हमारे कितने काम के होते हैं।
कभी जला कर उजाला कर लो।
तो कभी छत पर डाल कर छप्पर बना लो।।

वैसी ही ज़िन्दगी भी होती है।
कभी अपना बनाकर प्यार पा लो।।

तो कभी अपना दुश्मन बना कर अपनी ज़िन्दगी दावँ पर लगा लो।।
भाई बड़ी समानता है दोनों में।
दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं।।

कभी आज़माँ कर तो देखो दोनों को खुद जान जाओगे ज़िन्दगी की हक़ीक़त।

खुद जान जाओगे ज़िन्दगी की हक़ीक़त।!!

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।