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Thursday, 7 March 2024

तुम्हारा खत - 2

प्यारी विशाखा,

तुम्हारा खत मिला मुझे। मैं भी यहाँ कुशल से हूँ। अब तुम सोचोगी कि मरे हुए इंसान को खत कैसे मिल सकता है। तो अरे पगली, तुम्हारे दिल में चलने वाली धड़कन हूँ मैं। तुम सांस भी लेती हो न तो पता चल जाता है मुझे। 

अच्छा ये सब छोड़ो और ये बताओ क्या कह रही थी तुम कि जमुना काकी रिश्ता लेकर आई हैं तुम्हारे लिए? विशु हाँ कर दो न इस शादी के लिए। क्या पता वो लड़का मुझसे भी बेहतर हो और मुझसे भी ज्यादा खुश रखे तुम्हे। और फिर मैं दे ही क्या पाया तुम्हें, सिवाय आंसुओं के। अभी एक नई नवेली दुल्हन ही तो थी तुम और देखो अब ये सफेद चोला दे दिया है तुम्हें। हंसने खाने की उम्र में आंसुओं और जिम्मेदारियों की बोरी दे दी है तुम्हें। 

प्रिय, उसको हाँ बोल दो क्या पता कल को वो तुम्हें पूरी दुनिया की सैर करवाए, और तुम्हें अपनी पलकों पर बैठा कर रखे।। और रही बात छोटे शौर्य की या छोटी विशाखा की तो मुझे पता है वो लड़का इस बच्चे को भी अपना लेगा क्योंकि वो होगा ही इतना प्यारा। 

मुझे हमेशा तुम लोगों की फिक्र होगी इसीलिए बोल रहा हूँ कर लो शादी और बना लो अपनी दूसरी दुनिया। घर की जिम्मेदारी तो दूर रह कर भी निभाई जा सकती है। बाकी तुम चिंता मत करो। मैं हूँ न।। 


तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा ,

शौर्य 


इस खत का पहला पार्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.. 

https://anupriyaagrahari3333.blogspot.com/2020/05/blog-post.html

Sunday, 3 May 2020

तुम्हारा खत


सुनो, आज काफी समय बाद तुम्हें खत लिख रही। मुझे पता भी नहीं कि पहले के खत तुम्हें मिले भी या नहीं। तुमने उन्हें पढ़ा भी या नहीं। मालूम है तुमने मना किया था खत लिखने को लेकिन आज बहुत हिम्मत करके फिर से लिख रही हूँ। सोचा तुम्हें फिक्र होगी मेरी शायद इसीलिये लिख रही।
तुम्हें वो बगल वाली जमुना काकी याद है? आज वो आयी थी घर पर मेरे लिए रिश्ता लेकर सबको ये रिश्ता बहुत पसंद आया पर मैंने ही मना कर दिया। करती भी क्यों न आखिर तुम्हें वचन जो दिया था हमेशा तुम्हारी रहने का। पता है काकी बता रही थीं लड़का समृद्घ परिवार का है रहन सहन सब अपने घर जैसा है। दूर बनारस में नौकरी करता है और देखने में सुन्दर सजीला है। कद काठी भी अच्छी है और कमाता भी अच्छा है। 
लेकिन पता नहीं क्यों मुझे पसंद नहीं आया। सब कहते रहे कि तुम नहीं आओगे बढ़ जाओ आगे अपनी जिंदगी में। पर मैंने ही मना कर दिया। दिल में एक उम्मीद का दिया है मेरे जो तुम्हारे आने की राह देख रहा है। 
पता है मुझे तुम भी यही कहोगे कि मैं अब तुम्हें भूल कर आगे बढ़ जाऊँ। लेकिन ये दिल नहीं मानता। अच्छा सुनो इन सब के चक्कर में तुम्हे एक बात बताना तो भूल ही गयी कि तुम पिता बनने वाले हो। इस घर में एक किलकारी गूंजने वाली है। मुझे इतना तो पता नहीं कि वो बेटा है या बेटी पर जो भी हो उसे भी मैं एक सैनिक बनाऊंगी और तुम्हारे शौर्य और शहीद होने की गाथा उनको हर रोज सुनाऊँगी। बताऊँगी कि तुमने किस तरह उन आतंकियों का सफाया किया और फिर शहीद होकर अमर हो गए।
मुझे उम्मीद है कि तुम वहां कुशल से होगे यहाँ की चिंता मत करना मैं हूँ न सब संभाल लुंगी।
तुम्हारी अर्धांगिनी
विशाखा

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।