Thursday, 11 January 2018

राहें

आज भी निकलती हूँ उन राहों में।
जहाँ हम मिला करते थे।।

आज भी जाती हूँ उस पार्क में।
जहाँ हम अपनी बातें शेयर किया करते थे।।

आज भी जाती हूं उस रेस्टोरेंट में।
जहाँ हम पहली बार मिले थे याद है तुम्हें?

हां कैसे याद होगा वो सब एक झूठ एक फरेब ही तो था।
एक ढोंग जो था जो तुमने किया था मेरे साथ।।

कैसे याद होगा वो लम्हा जो तुम मुझे अपनी पसंद से देते थे।।

वो पिक्चर्स की स्क्रीन शॉट जो हम वीडियो काल पर लिया करते थे।।

याद है तुम्हे तुम्हारी एक हंसी वाली स्क्रीन शॉट ली थी मैंने??
कितना नाराज़ हो गए थे तुम उस पर।।

पर मेरे डिलीट कर देने पर मान गए थे।
पर एक बात बताऊं आज भी वो स्क्रीनशॉट है मेरे पास।

तेरी याद दिलाने के लिये तो लगता है ये गाने ये पिक्चर्स ही काफी हैं।।

आज भी याद आता है सब।।
आज भी निकलती हूँ उन गलियों जहाँ तेरा घर है ये सोच कर की शायद तुम दिख जाओ।।

जितना भी गुस्सा दिखाना है दिखा लो।
पर मिल जाओ और मेरा हाल चाल ले लो।।

और मैं मुस्कुराकर यही बोल पाऊँ।
कैसे रह सकती हूं तुम्हारे बिना वैसी ही हूँ जैसा तुम छोड़ कर गए थे।।

आज भी खुद से रूठी ही हूँ।
आज भी खुद से बिछड़ी ही हूँ।।

सोचती हूँ तेरे पास लौट आऊं।
तुझे जोर से गले लगाकर बोलूँ
आई मिस यू यार।

लौट आओ मेरे पास फिर से मुझे तन्हा करने के लिए।।
फिर से मुझे तन्हा करने के लिए।।

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