Friday, 23 February 2018

शहादत

आज फिर लाशों का ढेर देखा..
किसी की टूटती चूड़ियों को देखा

किसी की कोख उजड़ते देखा..
वो देखो आसमान भी रो रहा है..
अपने देश के शहीदों पर।।

जिनको राजनीती और हमारी बेरुखी ने मार दिया..
किसी का वादा आज फिर टूट गया..

किसी की प्यासी निगाहें अब प्यासी ही रह जाएँगी।।
एक माँ बाप जिन्हें हज़ार उम्मीदे थी अपने एकलौते बेटे से आज वो उम्मीद भी टूट गयी।।

एक बेटे का सपना था अपने "पिता" के साथ खेलने का बड़े होने का..
पर इन जालिमो ने वो सपना भी तोड़ दिया।।

एक बेटी की चाहत थी कि उसका कन्यादान उसके पिता के हाथों से हो..
पर वो चाहत भी इन धर्म के नेताओ ने तोड़ दिया।।

सूना कर दिया इस ज़मीन को, उस माँ की खोख़ को..
जुदा कर दिया एक बीवी को उसके सुहाग से बच्चे को उसके पिता से।।

आज फिर ख़ुदा भी रोया उन शहीदों को याद करके..
जिन्हें इस देश के दुश्मनों ने बॉर्डर पर मार दिया।।

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मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।