Thursday, 1 March 2018

पता नहीं।

पता नहीं उसके ख्यालों में मैं हूँ या नहीं।
पर मेरे ख्यालों में वो हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं उसके सांसों में मेरी खुश्बू है या नहीं।
पर मेरे सांसों में उसकी खुशबू हर वक़्त रहती है।।

पता नहीं उसे मेरा ख्याल है या नहीं।
पर मुझे उसका ख्याल हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं वो मुझे कभी अपना माना था या नहीं।
पर वो मेरा हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं उसकी मुस्कान में मैं हूँ या नहीं।
पर मेरी मुस्कान में वो हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं उसे मुझसे कभी प्यार था या नहीं।
पर मुझे उससे प्यार हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं उसकी बाँहों में मेरा एहसास है या नहीं।
पर मेरी बाँहों में उसका एहसास हर वक़्त रहता है।।

पता नहीं उसका दिल मुझसे मिलने को करता है या नहीं।
पर मेरा दिल हर उससे मिलने को हर वक़्त रहता है।।

1 comment:

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।