Monday, 28 May 2018

Batein

सुनो, कुछ कहना है तुमसे।
हाँ हाँ तुमसे।।
जिस तरह से ये 4 सेमेस्टर बीता है हँसते खेलते, लड़ते झगड़ते, रूठते मनाते बीता है वैसे ही आगे भी बीतेगा न, है न??

पहले सेमेस्टर की कुछ यादें हैं जो आज भी सहेज कर रखी हैं मैंने इस दिल में।

दूसरे सेमेस्टर में लड़ना भी हुआ हमारा।
पर मज़ाल किसी की जो आकर आग लगा जाये।।

तीसरे सेमेस्टर में कुछ बदमाशियां भी हुई थीं।
जिसमें कुछ खट्टी मीठी यादें भी हैं।।

चौथा सेमेस्टर में हमारी और ज्यादा मस्ती हुई थी।
ऑफिस से जल्दी भागकर सहारा गंज जाना, मस्ती करने जाना, मूवी पिज़्ज़ा और सब।।

उसके बाद कॉलेज आने पर कुछ छुटपन की यादें बटोरना ये कह कर की 'last semester h yr"

फिर धीरे धीरे एग्जाम का आना और डर का बढ़ना।
ये सब तुम भूल तो नही जाओगे न है न?

अब इसके आगे कुछ भी नहीं कह सकती।।
I m sorry I lv u ❤❤❤😘😘😘

1 comment:

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।