Wednesday, 9 August 2023

......तो इस वजह से बाली ने मानी थी 'इनसे' हार .....


कहते हैं कि किष्किन्धा के राजा बाली को एक वरदान प्राप्त था जिसके अनुसार बाली से जो भी युद्ध करेगा उसकी आधी शक्ति बाली के पास चली जाएगी। यही वजह थी कि हर कोई उसके समक्ष आने से डरता था और उससे दूरी बनाए रखता था।


बाली को उसके धर्मपिता इन्द्र ने उसे एक सोने का हार दिया था जिसको स्वयं ब्रह्मा जी ने मंत्रयुक्त किया था, जिसके अनुसार जो भी शत्रु बाली के समक्ष आएगा उसकी आधी शक्तियां बाली में समाहित जो जाएगी।


पौराणिक कथाओं में ये भी चर्चा है कि बाली की शक्तियों के बारे में सुनकर रावण ने उससे युद्ध करने की ठान ली थी लेकिन बाली ने उसे 6 महीने तक अपनी काँख में दबाए रखा जिसके बाद रावण ने बाली से दोस्ती कर ली थी।


एक बार हनुमान जी जंगल में तपस्या कर रहे थे और राम का नाम जप रहे थे तभी उनको बाली के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई। इसके बाद उन्होंने बाली के पास जाकर उनके चिल्लाने का कारण पूछा तो बाली ने उनको ललकारते हुए कहा कि जिस राम की तुम इतनी भक्ति करते हो वो राम भी मेरे बल के आगे नहीं टिक पाएगा, इसके बाद हनुमान जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने बाली को दंगल के लिए चुनौती दे दी।


अगले दिन सूर्योदय के बाद जब हनुमान जी दंगल के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में उनको ब्रह्माजी मिले और उन्होंने हनुमान जी से इस युद्ध को न करने का आग्रह किया लेकिन हनुमान जी ने कहा कि यदि वो इस युद्ध से पीछे हट जाएंगे तो उनके प्रभु की जग हसाईं होगी, इसलिए उनको यह युद्ध करना ही होगा। इस बात पर ब्रह्मा जी ने हनुमान जी से कहा कि यदि वो ये युद्ध करना चाहते हैं तो उनको अपने बल का दसवां हिस्सा ही लेकर जाना चाहिए बाकी श्री राम के चरणों में समर्पित कर दें, हनुमान जी को यह बात जँच गई और वो अपनी शक्ति का 10वां हिस्सा लेकर ही मैदान में गए।


इसके बाद जैसे ही वो बाली के समक्ष आए उनकी आधी शक्तियां बाली के पास चली गईं जिसकी वजह से उनको काफी भारीपन महसूस हो रहा था। इस वाक्ये के बाद ब्रह्मा जी स्वयं वहाँ आए और बाली को भाग जाने की सलाह देने लगे और उनका कहा मानकर बाली वहाँ से भाग खड़ा हुआ।


भागते हुए रास्ते में बाली को फिर से ब्रह्म देवता मिले और उन्होंने कहा कि ‘ हे वानर! तू जिससे युद्ध करने चला था वो तो सिर्फ अपनी शक्तियों का 10वां हिस्सा लाए थे, तो सोच अगर वो अपनी पूरी शक्ति लाते तो क्या होता तेरा? ’


इस बात को जानकर बाली को अपनी गलती का एहसास होता है और वो हनुमान जी के चरणों मे गिर कर माफी मांगते हैं और कहते हैं कि 'सबसे बलवान आप हैं प्रभु, मैं तो आपके बाल के बराबर भी नहीं हूँ। आपको चुनौती देने पर मुझे क्षमा करें वीर हनुमान।'

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