Showing posts with label Birth. Show all posts
Showing posts with label Birth. Show all posts

Saturday, 2 August 2025

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और यादगार लगा। लेकिन उसने शीरीन को भी बुलाया था यह बात मानो उसके और दिमाग में बैठ गई थी। वो एक पल के लिए असहज हो गई थी लेकिन दूसरे ही पल खुशी से झूम उठी थी।


किया ने काया के लिए एक सुंदर सी रेड कलर की ड्रेस ऑर्डर करी थी जिसको पहन कर वो किसी परी से कम नही लग रही थी। अपने हुस्न से कॉलेज के लड़कों को दीवाना बनाने वाली काया आज भी बिल्कुल वैसी ही दिख रही थी। सुंदर सा गोल चेहरा, गुलाबी होंठों पर प्यारी सी मुस्कान, ऊंचा- लंबा सा कद एक दम स्लिम और फिट।

तैयार होकर जब काया बाहर आई तो सबकी नजरें उसी पर ठहर गईं और शीरीन... शीरीन तो एकटक उसी को देखे जा रहा था मानो पूछ रहा हो- “ काया आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि तुम मुझे और अपना शहर, अपनी गली अपनी दुनिया छोड़ कर यहाँ चली आई?”  लेकिन काया के पास उसके इन सवालों का कोई जवाब नहीं था।



अभी वो ख्यालों में खोई ही थी कि काया ने उसे हिलाते हुए कहा , “ क्या हुआ मम्मा आप ऐसी शांत सी खड़ी क्यों हो गईं? आओ न चलो केक काटते हैं उसके बाद बढ़िया डिनर करते हैं फिर आप अपने दोस्तों के साथ अपनी दुनिया की बातें करना। “ “ अच्छा दादी अम्मा चलो काटते हैं केक। “ कहते हुए काया हंसने लगी, और केक काटने चल दी।

केक काटने के बाद सब डिनर करने चले गए। इन सब के बाद सबने बाहर जाने का प्लान बनाया लेकिन किया ने मना कर दिया क्योंकि अगले दिन उसका स्कूल था। आरती को उसके पास रोक कर सब बाहर घूमने चले गए।


पहले सबने मरीन ड्राइव उसके बाद जुहू बीच जाने का प्लान सेट किया था। मरीन ड्राइव जाकर सबने मुंबई स्पेशल वडा पाव खाया फिर उसके बाद एक जगह देख कर बैठ गए। उसके बाद खूब सारी फ़ोटोज़ क्लिक करवाने के बाद सब अपने दिनों की बातें शेयर करने लगे। तभी काया की नजरें शीरीन से टकरा गईं जो एकटक उसको ही देखे जा रहा था, जिससे काया थोड़ी असहज हो गई। फिर शीरीन ने ही बात को संभालते हुए कहा, “ काया इतने सालों तक तुम यहाँ थी ये बात हम में से किसी को बताया क्यों नहीं था? क्यों तुम लखनऊ छोड़ कर यहाँ आ गई? आखिर ऐसी क्या बात हो गई थी, कि तुमने हम में से किसी को कुछ भी नहीं बताया ? “

इसी बीच बात काटते हुए सिया ने कहा , “ शीरीन मुझे पता था काया यहाँ पर है। एवेन मेरी अक्सर उससे बात और वीडियो कॉल होती रहती थी।" 


सिया की यह बात सुनकर शीरीन को एक झटका सा लगा क्योंकि उसकी अक्सर ही सिया से बात होती थी लेकिन उसने कभी भी नहीं बताया कि काया यहाँ मुंबई में है। बात आगे बढ़ाते हुए सिया ने कहा , “ मुझे काया ने मना किया था किसी को भी यह बात बताने के लिए। क्योंकि उस एक्सीडेंट के बाद काया टूट सी गई थी एकदम इसीलिए। “

“एक्सीडेंट ? कौन सा एक्सीडेंट ?” शीरीन ने हैरान होते हुए पूछा।

 

 

आखिर ऐसा हुआ था काया के साथ जो वो इतना बदल गई थी और सब कुछ छोड़ कर लखनऊ से मुंबई आ गई?

अब इसके आगे क्या हुआ ये जानने के लिए जुड़े रहिए मेरे ब्लॉग के साथ।

इसके पहले पार्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें - https://anupriyaagrahari3333.blogspot.com/2024/04/1.html


Wednesday, 3 April 2024

मुम्बई की एक शाम - 1

शाम के वक़्त मरीन ड्राइव का नज़ारा ही कुछ अलग होता है न। सनसेट के वक़्त सूरज की लालिमा आसमान में बिखरी होती है और ऐसा लगता है जैसे सूरज और धरती का मिलन हो रहा हो। उस शाम मन थोड़ा उदास था तो सोचा समुद्र के किनारे ठंडी हवा के झोंके से मन हल्का कर लूँ। मेरे आस पास लोग हंसी ठहाके के साथ मस्ती कर रहे थे। तभी नज़र एक दोस्तों के ग्रुप पर पड़ी। हंसी ठहाकों के साथ वो लोग एक दूसरे को छेड़ रहे थे। उस ग्रुप में शायद एक कपल भी थे जिनको वो लोग तंग कर रहे थे। मेरी नज़र उनपर ही ठहर गयी थी।

मेरा मन परेशान था लेकिन क्यों? आखिर कमी ही क्या थी मेरे पास। इतनी केयरिंग फॅमिली थी, अच्छी नौकरी थी। सब के बीच मेरा नाम भी काफी था और डर भी। डर इसलिये क्योंकि मुझे काम के वक़्त कोई मस्ती मज़ाक पसन्द नहीं था। खैर जो भी था आज तो कुछ अलग ही दुनिया में ख़ो गयी थी मैं।

मुझे याद आ रहा था मेरा शहर, मेरी दुनिया, मेरे लोग। जिसे... जिसे उस एक हादसे ने मुझसे दूर कर दिया था। याद आ रहा था वो खौफनाक मंज़र जब उस आदमी ने मेरे वजूद को कुचलने की कोशिश की थी। कितनी मुश्किल से भागी थी मैं। भागते भागते न जाने कब इस दुनिया में आ गयी। जहाँ कोई मेरा होकर भी मेरा है ही नहीं। नहीं ऐसा नहीं है कि मैं इस शहर की अपना नहीं पाई हूँ या ये शहर मेरा नहीं है। हम दोनों ही अब एक दूसरे के हो चुके हैं। पर फिर भी कुछ खाली खाली सा है।

तभी हंसी की आवाज़ से मैं फिर चौंकी और अपनी सोच से बाहर आ गयी। "रीना तुम्हें मुम्बई आये इतने साल हो गए। और पिछले 2 साल से हम लिव इन में हैं तो क्या अब हमें कुछ सोचना नहीं चाहिए? तुम्हें नहीं लगता अब हमें अपने पेरेंट्स से हमारे बारे में बात करनी चाहिए?" उन दोस्तों के ग्रुप में बैठे कपल ने कहा। उनकी ये बात सुनकर मुझे शिरीन की याद आ गयी।

हाँ वही शीरीन जो मेरे साथ कॉलेज में था जिसके पीछे पूरा कॉलेज पागल था और वो पगला मेरे पीछे। मुझे भी उसका साथ पसंद था। अक्सर ही हम कॉलेज बँक करके मूवी शॉपिंग या घूमने जाते थे। नहीं नहीं हम दोनों अकेले नही जाते थे हमारे साथ हमारा पूरा ग्रुप होता था। जिसमें लगभग सभी कपल ही थे। सिर्फ हमें छोड़ कर। क्योंकि न तो कभी उसने अपने दिल की बात की न ही मैंने पहल की। आज अनायास ही उसकी याद आ गई। पता नहीं कहाँ होगा वो उसने शादी की होगी या नहीं।

उसने भी मुझे ऐसे ही शादी के लिए प्रपोज किया था और कहा था - काया मुझे तुमसे शादी करनी है। अपनी जिंदगी तुम्हारे साथ बितानी है, कई सारी memories बनानी है। बोलो करोगी तुम मुझसे शादी? बोलो न काया ? करोगी न ?

शीरीन... मुझे.. मुझे.. सोचने का वक़्त दो घर पर बात करने दो तब कुछ कह सकती हूँ। इतना कह कर मैं वहाँ से चली आई। उसके बाद क्या हुआ वो मैं याद भी नहीं करना चाहती। किस तरह से उस आदमी ने मेरे वजूद को खत्म किया वो भी याद नहीं करना चाहती मैं।

*मेरा फोन बज रहा है शायद।*

'हैलो मम्मा, कहाँ हो आप? मुझे बहुत डर लग रहा है जल्दी आ जाओ न। ' ये आवाज कियारा की थी मेरी 5 साल की बेटी की।

' क्यों बेटा क्या हुआ ? आरती आंटी चली गई क्या? '

' नहीं मम्मा , वो अभी हैं लेकिन लाइट चली गई है और मुझे डर लग रहा है जल्दी आओ न।। ’

' अच्छा ठीक है बेटा , तुम परेशान मत हो मैं आ रही हूँ। '

‘आंटी मम्मा आ रही है सब कुछ रेडी है न?’ कियारा ने कहा।

‘हाँ बेटा सब रेडी है आप जाओ जल्दी से रेडी हो जाओ। मैंने कपड़े निकाल के रख दिए हैं।’ आरती ने कहा।

दरअसल आज काया का जन्मदिन था जिसे वो कभी मनाना पसंद नहीं करती थी। लेकिन आज कियारा ने भी जिद पकड़ ली थी कि वो इस दिन को आज खास बना कर ही रहेगी। आखिर ये उसकी माँ का दिन था। इस दिन के लिए वो कई दिनों से तैयारियां कर रही थी। इसीलिए आज उनकी पसंद का खाना सजावट सब करी थी कियारा ने।

ये तो काया का हर साल का था वो अपने जन्मदिन के दिन हर बार मरीन ड्राइव या जुहू बीच जाकर बैठ जाती थी। कहती थी, सुकून है इन लहरों की आवाज में। शांति सी मिलती है इनको सुनकर। इसीलिए हर बार यहीं आकर बैठ जाती हूँ।

‘आज तो मम्मा खुश हो जाएंगी’, सोचते हुए कियारा तैयार होने चली गई।


पूरे घर को रेड small लाइट से सजा दिया था उसने। हर जगह दोनों की कई सारी फ़ोटोज़ निकलवा के छोटे छोटे से क्लिप्स से पिन कर दिया था। उसको यह idea facebook और गूगल करने पर आया था। उसने एक केक भी मँगवाया था जिस पर लिखा था ‘हैप्पी बर्थडे माई ब्यूटीफुल माँ।’ इनके किनारों पर उसने फूलों की पंखुड़ियाँ भी बिछाई थीं। पिछले न जाने कितने दिनों से वो इन सब की तैयारी कर रही थी।

गेट का दरवाजा खुलते ही काया ने अंदर एकदम अंधेरा पाया। उसने सोचा लगता है अब तक लाइट नहीं आई। फिर उसने कियारा को आवाज दी, ‘किया बेटा कहाँ है तू? देख तेरी माँ आ गई है।’

इसी के साथ कियारा ने पीछे से आकर लाइट ऑन कर दी साथ ही फैन भी जिस में से फूलों की बारिश काया पर होने लगी। एक बार को काया चौंक गई। और इसी के साथ सब एक साथ चिल्लाए ‘happy Birthday’।

कियारा ने फोन करके काया के ऑफिस और फ़्रेंड्स को भी बुला लिया था। जिस में उसके पुराने शहर के दोस्त भी शामिल थे। और उन्हीं में था शीरीन। जिसको देख कर काया हैरान रह गई। उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे क्या बोले? लेकिन हिम्मत जुटा के बोल उठी, ‘किया ये सब क्या है और तुम मेरे पुराने दोस्तों को कैसे जानती हो?’

‘मम्मा मैंने आपके फोन में आपके दोस्तों की फोटो देखी थी और समझ गई थी कि आप आज भी इन लोगों को बहुत मिस करती हो तो मैंने चुपके से सिया मासी को फोन कर दिया और उनसे सबका नंबर लेकर आपको सप्राइज़ दे दिया। तो बताओ कैसा लगा मेरा सप्राइज़?’ एक आँख बंद करते हुए किया ने पूछा।

‘अरे अरे बस बस अब तुम बातें ही करते रहोगे या केक कट करके हमें भी बात करने का मौका दोगे?’ उन दोनों को बीच में ही रोकते हुए सिया बोली।

'हाँ हाँ मासी चलो हम लोग केक काटते हैं लेकिन मम्मा उसके पहले जाकर आप तैयार हो जाओ।' अपनी माँ को भेजते हुए कियारा ने कहा।

अब इसके आगे क्या हुआ ये जानने के लिए जुड़े रहिए मेरे ब्लॉग के साथ। 

Wednesday, 21 February 2024

......आखिर क्यों होती है पुरुषों की महिला से पहले मृत्यु...

गरुण पुराण एक ऐसा पुराण है जिसके अंतर्गत मनुष्यों के पाप पुण्य का पूरा लेखा-जोखा समाहित होता है। इस पुराण में मनुष्य के हर कर्म को लेकर भी एक एक सजा का वर्णन है। इस पुराण में मनुष्य के जनम से लेकर मृत्यु के बाद तक के सफर का भी वर्णन है, साथ ही यह भी वर्णित है कि महिलाओं के किस गलती की वजह से उनके पति की पूर्व मृत्यु हो जाती है।

गरुण पुराण के अनुसार, यदि कोई महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री या करवाचौथ का व्रत करती है लेकिन उसके नियमों का अच्छे से पालन नहीं करती है तो उसके पति की पूर्व मृत्यु हो जाती है। व्रत के दौरान अगर वो चुपके से कुछ खा लेती है या पानी भी पी लेती है और किसी को भनक तक नहीं लगने देती है तो ऐसे में उसके पति की युवावस्था में मृत्यु हो जाती है।

इस पुराण के अनुसार, यदि कोई महिला नियमानुसार सारे तीज-त्योहार करती है लेकिन अपने पति से हमेशा लड़ती है, उसको उल्टा सीधा बोलती है, उसको मारती पीटती है या अपने पति की बात- बात पर झूठी कसम खाती है तो भी उसके पति की युवाकाल में ही मृत्यु हो जाती है। क्योंकि पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है और परमेश्वर से कलह करना मतलब पाप का भागीदार होना है।

गरुण पुराण के अनुसार, यदि कोई शादीशुदा महिला अपने पति के नाम का मंगलसूत्र निकाल देती है, पैर में पायल और बिछिया नहीं पहनती है, हाथ में चूड़ियां, और मांग में सिंदूर नहीं लगाती है तो ऐसे में उसके पति की मृत्यु जल्दी हो जाती है।

इस पुराण के अनुसार, यदि कोई महिला मांस- मदिरा का सेवन करती है, हर समय मन में गलत विचार लाती है, गलत काम करती है पराए मर्दों की तरफ नजर रखती है, पराए मर्दों के साथ संबंध स्थापित करती हैं तो ऐसे में भी पति की पूर्व मृत्यु हो जाती है।

गरुण पुराण के अनुसार, यदि कोई महिला बृहस्पतिवार को बाल धोती है तो ऐसे में उसके पति और बच्चे की जान को खतरा हो जाता है। इस पुराण के अनुसार ऐसी स्थिति में महिला को जल्दी ही अपने पति और बच्चे के सुख से वंचित रहना पड़ता है।


मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।