Tuesday, 20 February 2024

Green Peas : हरी मटर खाने के ये हैं फायदे, ऐसे कर सकते हैं स्टोर

अगर हरी मटर को सर्दियों में सब्जियों का राजा कहा जाए तो गलत नहीं होगा शायद। मटर को किसी भी अन्य सब्जी के साथ मिक्स करके खाने से सब्जी का स्वाद दोगुना हो जाता है। क्योंकि हरा मटर हर किसी का मनपसंद होता है लेकिन क्या आप जानते हैं हरे मटर से कई तरह के फायदे और नुकसान भी हो सकते हैं। हरे मटर से मोटापे में कमी भी देखी जाती है तो वहीं हरे मटर से शुगर लेवल भी हाई देखा जा सकता है। तो चलिए आज जानते हैं किस तरह से हरा मटर हमारे लिए किस तरह से उपयोगी हो सकता है :

बढ़ाए दिल की उम्र Green Peas

हरी मटर हमारे दिल को स्वस्थ रखने में भी मददगार होता है। यदि हम मटर का नियमित रूप से सेवन करते हैं तो यह दिल की उम्र को भी बढ़ाने में मददगार साबित होता है। मटर में कई तरह के पोशाक तत्व होते हैं जो हमारे दिल को सही रखने के लिए कई तरह के बीमारियों को दूर रखता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करे

हरी मटर हमारे शरीर के इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अंदर पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो शरीर को चुस्त और तंदुरुस्त बनाता है।

कैंसर से भी बचाता है                                

हरी मटर कैंसर से भी बचाती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमारे शरीर में बनने वाले कैंसर कारकों को जड़ से खत्म कर देता है। 

वजन घटाने में करता है मदद

हरी मटर वजन घटाने में मदद करती है। मटर में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है जिसकी वजह से यह वजन घटाने में काफी मददगार साबित होता है।

अर्थराइटिस में फायदा

सेलेनियम नाम के पोषक तत्व की वजह से अर्थराइटिस में काफी आराम मिलता है। हरी मटर की वजह से जोड़ों के दर्द में भी काफी आराम मिलता है। कई बार तो यह दर्द को जड़ से खत्म करने में भी मददगार हो जाता है।

हरी मटर (Green Peas) के इस्तेमाल का फायदा

पोषक तत्व प्रचूर में उपस्थित

हरी मटर में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलती है। इसमें विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ए, फोलेट, मैंगनीज और पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

फाइबर के गुण

हरी मटर में फाइबर के गुण भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है। फाइबर कम भूख लगने में मदद करती है और मोटापे से बचाती है। जिसकी वजह से हरी मटर का सेवन पेट के लिए अच्छा उपाय माना गया है।

एंटीऑक्सीडेंट के गुण

मटर में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। जो हमारे शरीर के लिए विटामिन सी और ए के लिए अच्छा स्रोत माना जाता है।



इस तरह से स्टोर कर गर्मियों में भी खा सकते हैं हरा मटर

अभी तक तो हम लोगों ने मटर के फायदे पढ़े। लेकिन अब हम आपको बताते हैं कि आप गर्मियों में भी मटर खाकर अपनी सेहत का ख्याल कैसे रख सकते हैं :

ग्लास कंटेनर

अगर आप मटर को फ्रीज़ में स्टोर करने का सोच रहे हैं इसके लिए आप ग्लास कंटेनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि ग्लास कंटेनर में मटर के दाने वैसे ही रहते हैं जैसा आप स्टोर करते समय रखते हैं।

एयरटाइड डिब्बे का इस्तेमाल

आप चाहें तो एयरटाइड डिब्बे में भी मटर को स्टोर कर सकती हैं। ये चारों तरफ से बंद रहता है जिससे मटर में बाहरी हवा नहीं जाती और ये खराब या कड़वाहट से भरा भी नहीं होता है।

पन्नी का इस्तेमाल

अगर आप चाहें तो इसको पन्नी में भी स्टोर कर सकते हैं। इसमें भी यह खराब नहीं होता है और न ही कड़वाहट से भरा होता है। जिससे हम इसे आसानी से बाद में इस्तेमाल कर ले जाते हैं।

Friday, 9 February 2024

पेट की चर्बी को कहें Bye-Bye, इन चीजों से करें चर्बी को कम...



कई बार ऐसा होता है कि हम सही डायट प्लान करते हैं फिर भी पेट की चर्बी होती है कि कम होने का नाम ही नहीं लेती है। जिसकी वजह से पेट बाहर की ओर निकला और मोटा लगता है। कई बार ऐसा होता है कि हम कई exercise करते हैं, कम खाना खाते हैं, व्यायाम करते हैं लेकिन पेट कम नहीं होता है तो इन सब में कहीं न कहीं क्या मिस हो रहा है उस पर ध्यान देने की जरूरत होती है। तो आईए देखते है कि आखिर किस वजह से हमारे पेट की चर्बी कम नहीं होती है :

1.     खाने की आदत –

कई बार ऐसा होता है कि हमारे खाने की आदत की वजह से भी पेट की चर्बी कम नहीं होती है बल्कि बढ़ जाती है। खाने में जैसे ज्यादा तेल-मसाला खाना, जंक फूड खाना, बाहरी खानों को तूल देना इत्यादि चीजों से भी हमारा बेली फैट कम नहीं होता है।

2.     चीनी युक्त भोजन –

खाने में अत्यधिक मात्रा में चीनी भी नुकसान दायक होता है, यदि हम जरूरत से ज्यादा चीनी, मीठा, मिठाई, इत्यादि खाते हैं तो भी बेली फैट कम नहीं होता है इसके साथ ही शरीर में और भी कई तरह के रोग हो जाते हैं जो हमारे लिए नुकसानदायक होता है।

3.     मदिरा पान –

कहते हैं कि मदिरापान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, लेकिन वहीं कई लोग बोलते हैं कि अगर जुखाम हुआ है तो थोड़े से मदिरा सेवन से वो जल्दी ठीक हो जाता है। वहीं कई बार इसके ज्यादा सेवन से भी पेट की चर्बी बढ़ जाती है और पेट थुलथुल नजर आता है।

4.     तनाव –

कभी- कभी ज्यादा तनाव भी बेली फैट बढ़ाने का काम कर सकता है। जैसे आपके सोच के हिसाब से आपका मस्तिष्क काम करता है ठीक वैसे ही आपके कार्यकलापों के हिसाब से आपका फैट भी काम करता है। आपके तनाव का पूरा असर आपके बेली फैट पर पड़ता है।


5.     कम व्यायाम –

सुबह-सवेरे कम व्यायाम करने से भी बेली फैट में असर पड़ता है। अगर आप कम व्यायाम करते हैं, exercise करने में कंजूसी करते हैं तो इसकी वजह से भी आपका फैट बढ़ सकता है।

6.     कम नींद –

कभी कभी कम नींद लेना भी फैट बढ़ाने का काम कर सकता है। क्योंकि अगर आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं और हर वक़्त उबासी सी लेते हैं तो यह भी एक मुख्य कारण हो सकता है आपके फैट के बढ़ने का।

चलिए ये तो था पेट की चर्बी बढ़ने का कारण। अब आईए देखते हैं पेट की चर्बी कम करने के उपाय को..

1.     पर्याप्त नींद लें –

 पेट की चर्बी कम करने के लिए पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी होता है। यदि आपकी नींद पूरी नहीं है तो आपका भोजन सही तरीके से digest नहीं हो पाता है और इसकी वजह से पेट में चर्बी जमा हो जाती है और पेट बाहर आने लगता है।

2.     पानी का पर्याप्त सेवन –

पानी के पर्याप्त सेवन से भी पेट की चर्बी में लगाम लगाया जा सकता है। अगर पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं किया जाएगा तो भोजन पेट के निचले हिस्से में चर्बी जमा हो जाएगी क्योंकि पानी चर्बी को हटाने में सहायक होता है।

3.     नियमित व्यायाम –

पेट की चर्बी को कम करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, इससे पेट में या शरीर के किसी भी अंग में फैट जमा नहीं हो पाता है और शरीर भी सुंदर और सुडौल बनता है।

4.     नाश्ता जरूर करें –

सुबह का नाश्ता कभी भी स्किप नहीं करना चाहिए। नाश्ता स्किप करने से पेट खाली रहता है और खाली पेट चर्बी ज्यादा बनाता है। जिसकी वजह से पेट की चर्बी बढ़ने लगती है।


डायट प्लान

v अपने दिन की शुरुआत एक ग्लास नींबू दालचीनी के पानी से करें।

v नाश्ते में वेजिटेबल सैंडविच लें, साथ में एक ग्लास मलाई रहित दूध लें।

v इसके बाद सुबह 11:00 बजे फल और बादाम खाएं।

v दोपहर 1:00 बजे दोपहर का भोजन करें। मसाला खिचड़ी की दो कटोरी के साथ एक कटोरी के अंकुरित दही सलाद और कम वसा वाली दही कढ़ी खाएं।

v दोपहर 3:30 बजे एक ग्लास छाछ के साथ भोजन को पचायें।

v शाम 4:00 बजे एक कप ग्रीन टी पिएं।

v उसके एक घंटे बाद आधा कटोरी उबले हुए चने लें।

v रात के खाने में दो रोटी, पालक पनीर की एक कटोरी और आधा खीरा खाएं।

v अपने दिन की समाप्ति एक कप मलाई रहित दूध के साथ करें।

Wednesday, 7 February 2024

इन नायाब तरीकों से बचाएँ अपने पैसे..


अक्सर ऐसा होता है कि हम कम खर्च का सोच कर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं जिससे हमारी इनकम से ज्यादा खर्च हो जाता है और सेविंग्स के नाम पर कुछ भी नहीं बचता तो ये ब्लॉग आपके लिए काम के हैं। इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे कि किस तरह से आप अपने पैसे बचा सकते हैं और उसको दूसरे काम में ले सकते हैं। पैसे कमाने के साथ ही उन्हें बचाना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि रोटी
, कपड़ा और मकान के साथ ही कई चीजें और भी होती है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप किस तरह से अपने कमाए हुए पैसों को बचा सकते हैं और उनका सही इस्तेमाल कर सकते हैं..

1.     रिकार्ड बनाएँ –

आप हर महीने कितना और कहाँ खर्चा करते हैं उसका एक रिकार्ड तैयार कीजिए और कोशिश कीजिए कि अगले महीने उन्हीं चीजों पर कम खर्च हो और फालतू के खर्चों पर लगाम हो। जैसे यदि आप पार्टी ज्यादा करते हैं तो कोशिश कीजिए कि पार्टी कम हो और यदि हो भी तो उसमें खर्चा कम हो।


2.     टेक्नॉलजी खर्च पर लगाम –

ज्यादातर लोग तकनीकी पर जरूरत से खर्च कर देते हैं, जैसे जो configuration आपको 15 हजार के मोबाईल पर मिल जाता है फिर भी शो ऑफ के लिए आप उसके 50 हजार देते हैं। ये भी एक तरह का फ़िजूल खर्चा ही है। इसी तरह लोग 35-40 हजार के लैपटॉप की जगह लोग 80- 90 हजार के लैपटॉप पर पैसा खर्च करते हैं। इस तरह के फ़िजूल खर्च पर भी लगाम लगाना जरूरी है।


3.     स्वाद पर नियंत्रण –

बहुत से लोग होते हैं जिनका स्वाद चटोरा होता है जो हर वक़्त बाहर का खाने का सोचते हैं। ऐसे लोग भी पैसों की बचत नहीं कर पाते हैं। क्योंकि उनको हर समय बाहर का खाना होता है और फ़िजूल खर्च करना होता है। उससे बचने के लिए आप घर के खाने को priority दें। जो भी खाने की इच्छा हो कोशिश करें कि घर पर ही बना लें यदि संभव हो तो घर के सादे भोजन को ही मान्यता दें और उसी को खाएँ।


4.     इनवेस्टमेंट का तरीका हो सही –

यदि आप पैसों को इन्वेस्ट करने का सोचते हैं तो इन्वेस्ट करने का तरीका भी सही हो इस बात का खास ख्याल हो। क्योंकि यदि आप इन्वेस्टमेंट के तरीके को नहीं सुधार पाएंगे तो आपके पैसों के डूबने का डर होगा। इसके लिए आप किसी अच्छे एजेंट से मिल सकते हैं जो आपको सही तरीके से पैसे इन्वेस्ट करने में मदद कर सकता है। वैसे यदि आप चाहें तो गूगल सर्च करके इनवेस्टमेंट को एक नया आयाम दे सकते हैं।


5.     टारगेट सेट करें –

आप चाहें तो एक टारगेट सेट कर सकते हैं जिसमें आप महीने के आखिरी दिन तक कितना खर्च किए और कितना बचाए हैं उसका टारगेट सेट कर लें। जैसे- यदि आप 50 हजार कमाते हैं तो आप कोशिश कीजिए कि महीने के आखिरी दिन तक आप कम से कम 10 हजार रुपए बचा सकें। ताकि आप इनवेस्टमेंट के लिए कुछ इकट्ठा कर सकें।


6.     शॉपिंग करते समय रहें सावधान –

अगर आप शॉपिंग करने के शौकीन हैं तो आपको सावधान रहने की ज्यादा जरूरत है क्योंकि शॉपिंग करने के समय फ़िजूलखर्ची होने की ज्यादा संभावना होती है। क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि हम लेने सिर्फ एक चीज जाते हैं और लेकर चार चीज आते हैं। जिससे हमारा फ़िजूलखर्च बढ़ जाता है और महीने का बजट बिगड़ जाता है।


7.     बजट की तैयारी –

एक कुशल महिला को हमेशा अपना बजट बना कर चलना चाहिए। जिसमें महीने में लगने वाले राशन की लिस्ट हो जिसको आप हो सके तो एक बार में ही ले आईए ताकि ये रोज रोज तनिक तनिक के खर्चे से बचा जा सके और बचत भी अच्छी हो।

ऊपर दिए गए उपाय से उम्मीद है कि आप के खर्चे में थोड़ी सी लगाम तो लगेगी ही। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा कमेन्ट करके जरूर बताएँ।

Wednesday, 9 August 2023

......तो इस वजह से बाली ने मानी थी 'इनसे' हार .....


कहते हैं कि किष्किन्धा के राजा बाली को एक वरदान प्राप्त था जिसके अनुसार बाली से जो भी युद्ध करेगा उसकी आधी शक्ति बाली के पास चली जाएगी। यही वजह थी कि हर कोई उसके समक्ष आने से डरता था और उससे दूरी बनाए रखता था।


बाली को उसके धर्मपिता इन्द्र ने उसे एक सोने का हार दिया था जिसको स्वयं ब्रह्मा जी ने मंत्रयुक्त किया था, जिसके अनुसार जो भी शत्रु बाली के समक्ष आएगा उसकी आधी शक्तियां बाली में समाहित जो जाएगी।


पौराणिक कथाओं में ये भी चर्चा है कि बाली की शक्तियों के बारे में सुनकर रावण ने उससे युद्ध करने की ठान ली थी लेकिन बाली ने उसे 6 महीने तक अपनी काँख में दबाए रखा जिसके बाद रावण ने बाली से दोस्ती कर ली थी।


एक बार हनुमान जी जंगल में तपस्या कर रहे थे और राम का नाम जप रहे थे तभी उनको बाली के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई। इसके बाद उन्होंने बाली के पास जाकर उनके चिल्लाने का कारण पूछा तो बाली ने उनको ललकारते हुए कहा कि जिस राम की तुम इतनी भक्ति करते हो वो राम भी मेरे बल के आगे नहीं टिक पाएगा, इसके बाद हनुमान जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने बाली को दंगल के लिए चुनौती दे दी।


अगले दिन सूर्योदय के बाद जब हनुमान जी दंगल के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में उनको ब्रह्माजी मिले और उन्होंने हनुमान जी से इस युद्ध को न करने का आग्रह किया लेकिन हनुमान जी ने कहा कि यदि वो इस युद्ध से पीछे हट जाएंगे तो उनके प्रभु की जग हसाईं होगी, इसलिए उनको यह युद्ध करना ही होगा। इस बात पर ब्रह्मा जी ने हनुमान जी से कहा कि यदि वो ये युद्ध करना चाहते हैं तो उनको अपने बल का दसवां हिस्सा ही लेकर जाना चाहिए बाकी श्री राम के चरणों में समर्पित कर दें, हनुमान जी को यह बात जँच गई और वो अपनी शक्ति का 10वां हिस्सा लेकर ही मैदान में गए।


इसके बाद जैसे ही वो बाली के समक्ष आए उनकी आधी शक्तियां बाली के पास चली गईं जिसकी वजह से उनको काफी भारीपन महसूस हो रहा था। इस वाक्ये के बाद ब्रह्मा जी स्वयं वहाँ आए और बाली को भाग जाने की सलाह देने लगे और उनका कहा मानकर बाली वहाँ से भाग खड़ा हुआ।


भागते हुए रास्ते में बाली को फिर से ब्रह्म देवता मिले और उन्होंने कहा कि ‘ हे वानर! तू जिससे युद्ध करने चला था वो तो सिर्फ अपनी शक्तियों का 10वां हिस्सा लाए थे, तो सोच अगर वो अपनी पूरी शक्ति लाते तो क्या होता तेरा? ’


इस बात को जानकर बाली को अपनी गलती का एहसास होता है और वो हनुमान जी के चरणों मे गिर कर माफी मांगते हैं और कहते हैं कि 'सबसे बलवान आप हैं प्रभु, मैं तो आपके बाल के बराबर भी नहीं हूँ। आपको चुनौती देने पर मुझे क्षमा करें वीर हनुमान।'

Wednesday, 31 March 2021

माँ कुछ लिखा है तुम्हारे लिए।।

माँ आज काफी समय बाद कुछ लिखा है आपके लिए। पता है इसको पढ़ने के लिए आप नहीं हैं यहाँ लेकिन मैं फिर भी आपको भेजूंगी ये।।  जानती हूँ नहीं पढ़ पाओगी इसको फिर भी दूंगी ये आपको। मुझे याद है आप मुझे लिखने के लिए कितना फ़ोर्स करती थी हमेशा बोलती थी ' निधि कुछ लिखी नया नहीं लिखी हो क्या? क्या कर रही हो लिखो कुछ बड़ा मन हो रहा है तुमको पढ़ने का' और मैं झट से फ़ोन लेकर बैठ जाती थी आपके लिए कुछ लिखने। फिर पूरा होते ही कित्तने चाव से आप उसको पढ़ती थी मेरी गलतियां बताती थी। लेकिन अब ऐसा करने वाला कोई नहीं माँ। अब नहीं हो आप उसको पढ़ने के लिए।
माँ पता है जब भी मैं किसी को उसके माँ के साथ मार्केट जाते, स्टॉल पर चाट- टिकिया खाते देखती हूँ न मुझे आपकी याद आ जाती है कि कैसे हम लोग बाहर जाते थे शॉपिंग करके खाते पीते आते थे। माँ पता है जब भी देखती हूँ किसी को अपनी माँ के हाथ से खाना खाते, पैरों पर सर रख कर सोते, उनके साथ मस्ती करते, उनको अपने दिल की बात बताते मुझे आपकी कमी तब बहुत खलती है माँ। आप होतीं तो शायद मैं भी अपने मन के गुबार को निकाल देती कभी आपके कांधे पर सर रखकर तो कभी आपके पैरों पर। पता है माँ कभी कभी जब आपकी बहुत ज्यादा याद आती है आपसे बात करने का मन कर जाता है और हाथ फ़ोन के कीबोर्ड पर एकाएक आपका नम्बर मिलाने लगते हैं फिर जब याद आता है कि अब आप नहीं हो मुझे सुनने या सुनाने के लिए तो आँखों से आंसू यकीनन बिना रुके ही गिरने लग जाते हैं। कभी कभी तो रात को सोते टाइम ही आपकी फोटो देखकर याद आती है और आंसू थमने का नाम नहीं लेतीं तो आपके दामाद जी बड़े प्यार से पूछा करते हैं तब 'बताओ निधि क्या हुआ क्यों रो रही हो? मम्मी की याद आ रही है कोई बात है जो तुम कहना चाहती हो उनसे? तो मुझसे कहो मैं हूँ न तुमको सुनने के लिए बताओ न क्या हुआ है?' उस वक़्त मैं बस ये कह पाती हूँ 'नहीं कुछ नहीं है।' जबकि मुझे पता होता है कि एक गुबार भरा है मेरे मन में जिसको मैं निकालना चाहती हूँ जिसको न निकाला मैंने तो एक वक़्त के बाद वो मुझ पर हावी हो जायेगा और मैं टूट जाऊंगी शायद तब मैं खुद को ख़ो भी दूंगी। 
पता है माँ कभी कभी मन होता है आपसे मिलने का आपको गले लगाने का कुछ कहने का लेकिन ये सब पॉसिबल नहीं है अब। माँ आपके बिना बेकार हो चुकी हूँ मैं। कुछ भी नहीं जानती हूँ मैं अब बस जानती हूँ तो आपको और आपके प्यार को। 
माँ याद है आपको कितना ज़िद करती थी मैं आपसे हर चीज़ के लिए कभी कुछ खाने के लिए तो कभी बाहर जाने के लिए। मार्केट तो जैसे मुझे आपके ही साथ जाना होता था, और आप उफ़ चलने का नाम ही नहीं लेती थीं मुझे कभी ठाकुर आंटी तो कभी शिखा तो कभी बिट्टू के साथ जाने को बोलने लगती थी और मैं ज़िद करके सिर्फ आपके साथ जाती थी फिर भाभी आयीं और फिर कभी आप तो कभी भाभी तो कभी दीदी। मेरी ज़िद भी अलग ही हुआ करती थी आपसे न माँ। आप उसको पूरा भी करती थी साथ में ये ताना देकर यहाँ तो हम झेल ले रहे हैं देखना सासू माँ से अपनी ऐसे ही ज़िद करोगी न तो भगा दी जाओगी। माँ पता यहाँ मम्मी भी वैसी ही हैं जैसे आप थी लेकिन उनसे मैं ज़िद नहीं कर पाती आपके जैसे। 
आप मेरे लिए बहुत स्पेशल थी और हो पर हमेशा रहोगी।
आई लव यू माँ।। ♥️♥️
थैंक यू फॉर बीइंग देयर फॉर मी।। 😘

Sunday, 3 May 2020

तुम्हारा खत


सुनो, आज काफी समय बाद तुम्हें खत लिख रही। मुझे पता भी नहीं कि पहले के खत तुम्हें मिले भी या नहीं। तुमने उन्हें पढ़ा भी या नहीं। मालूम है तुमने मना किया था खत लिखने को लेकिन आज बहुत हिम्मत करके फिर से लिख रही हूँ। सोचा तुम्हें फिक्र होगी मेरी शायद इसीलिये लिख रही।
तुम्हें वो बगल वाली जमुना काकी याद है? आज वो आयी थी घर पर मेरे लिए रिश्ता लेकर सबको ये रिश्ता बहुत पसंद आया पर मैंने ही मना कर दिया। करती भी क्यों न आखिर तुम्हें वचन जो दिया था हमेशा तुम्हारी रहने का। पता है काकी बता रही थीं लड़का समृद्घ परिवार का है रहन सहन सब अपने घर जैसा है। दूर बनारस में नौकरी करता है और देखने में सुन्दर सजीला है। कद काठी भी अच्छी है और कमाता भी अच्छा है। 
लेकिन पता नहीं क्यों मुझे पसंद नहीं आया। सब कहते रहे कि तुम नहीं आओगे बढ़ जाओ आगे अपनी जिंदगी में। पर मैंने ही मना कर दिया। दिल में एक उम्मीद का दिया है मेरे जो तुम्हारे आने की राह देख रहा है। 
पता है मुझे तुम भी यही कहोगे कि मैं अब तुम्हें भूल कर आगे बढ़ जाऊँ। लेकिन ये दिल नहीं मानता। अच्छा सुनो इन सब के चक्कर में तुम्हे एक बात बताना तो भूल ही गयी कि तुम पिता बनने वाले हो। इस घर में एक किलकारी गूंजने वाली है। मुझे इतना तो पता नहीं कि वो बेटा है या बेटी पर जो भी हो उसे भी मैं एक सैनिक बनाऊंगी और तुम्हारे शौर्य और शहीद होने की गाथा उनको हर रोज सुनाऊँगी। बताऊँगी कि तुमने किस तरह उन आतंकियों का सफाया किया और फिर शहीद होकर अमर हो गए।
मुझे उम्मीद है कि तुम वहां कुशल से होगे यहाँ की चिंता मत करना मैं हूँ न सब संभाल लुंगी।
तुम्हारी अर्धांगिनी
विशाखा

Friday, 7 June 2019

रौनक का जन्मदिन

देखो देखो बाहर ये शोर कैसा हो रहा है।
मेरे घर दो नन्हें क़दमों का आगमन हो रहा है।।
कुछ इसी तरह के पोस्ट मैंने दो साल पहले आज ही के दिन अपनी खुशी को ज़ाहिर करने के लिए डाली थी। खुश होती भी क्यों न आखिर पहली बार बुआ बनी थी वो भी एक लड़की की। मेरी हमेशा से एक चाह थी की भाई को लड़की हो जो मेरे बाद इस घर को संजो कर रखेगी। वैसे ही खुशियां बिखेरेगी जैसे हम और दी बिखेरा करते हैं। हुआ भी कुछ ऐसा ही भगवान ने मेरी सुन ली और ठीक 11 बजकर 47 मिनट रात्रि में हमारी भतीजी का जन्म हुआ। मैं घर पर अकेली थी क्योंकि कब किस चीज़ की ज़रूरत पड़े उसे भेजने के लिए उसके लिए हमे घर रहना ही उचित लगा था। तभी मम्मी का फोन आया और ये खुशखबरी मिली। मैं तो जैसे नाचने ही लगी थी, पूरे घर को सर पर उठा लिया था मैंने उस दिन। चाचा चाची को बताया और रात के ठीक 12 बजे हम अस्पताल पहुँच गये। फिर 1 बजे तक बाबू मेरे हाथों में थी। उसको लेकर ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया ही हाथ में आ गयी हो। वो नन्हे से हाथ, गुलाबी होंठ, आँखें भींच कर बंद हुई और माथे पर लाल निशान। उस वक़्त उसे देखने के लिए सबका ताँता लगा हुआ था। वो सावन में हुई थी और हम लोग ठहरे भोले के भक्त तो रख दिया उसका नाम शिवी। फिर वो घर आई और धीरे धीरे बड़ी होने लगी। दी की शादी का दिन भी आ गया जब वो सिर्फ 5 महीने की थी। उसकी आंखें तो बस एकटक लाइट को ही देखती रहती। फिर दी विदा हो गयी। सब कुछ पहले जैसा हो गया। फिर वो बड़ी होने लगी साथ में उसकी बदमाशियां भी। कहने को लड़की थी वो जिसे शांत और सजल कहा जाता है, पर वो?? उफ्फ!! उसकी सारी हरकतें, लड़को वाली कभी रिमोट फेंकना, कभी सब्जी किचन से उठाकर बेड पर रखना तो कभी खिलौनों को खेलने से ज्यादा तोड़ देना।
फिर आया उसका पहला जन्मदिन। अब तक तो वो सबको जानती है पहचानती है। वो खुद बड़ी हुई साथ ही उसकी बदमाशियां भी। अपनी दादी से तो उसका छत्तीस का आंकड़ा रहा है हमेशा से। कभी उनको मारना, कभी दांत काटना तो कभी बाल नोचना। पर उस दिन वो थोड़ी शांत सी थी उसके चेहरे को देख कर उसके शांत होने की वजह कोई भी आसानी से जान जाता। क्योंकि चौबीस साल बाद कोई लड़की पैदा हुई है। या ये कहें कि घर में किलकारी गूंजी थी। तो उसके पहले जन्मदिन पर रामायण उसके बाद बड़ी सी पार्टी का आयोजन था। उस दिन वो इतने सारे लोगों को देखकर शांत थी। उसकी शांति को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि ये रोजाना वाली लड़की है। जो पूरा घर सर पर उठाए रहती है। उसके दादू, पापा, मम्मा, छोटी बुआ, दादी सब तैयारियों में थे। उसकी बड़ी बुआ नहीं आ पाई थी कुछ दिक्कतों की वजह से लेकिन हाँ उन्होंने उसके फूफाजी के हाथों खूब सारा खिलौना और अपना प्यार भेजा था। जो उसके लिए ज्यादा कीमती था। फिर नाना नानी का लाया तोहफा भी उसके लिए खास ही था आखिर ननिहाल से जो आया था। धीरे धीरे पार्टी ख़त्म हुई और सब मेहमान चले गए। और वो फिर अपनी दिनचर्या में बिजी हो गयी।
इतने दिनों में कुछ नहीं बदला था सिवाय एक चीज़ के वो थी उसकी बातें अब वो दादी अम्मा जैसे टिपिर टिपिर बोलने लगी थी। जैसे मुझे वीडियो कॉल करके कहना "बुआ इतनी सारी चोकलेट लाना, बुआ लॉलीपॉप ले आना, बुआ मम्मी मारी" जैसी बातें अब वो साफ़ बोलने लगी थी। अगर कोई उसे गलती से भी डांट दे तो मज़ाल वो बच जाए सीधा दादू के पास दौड़ लगाती है और शिकायत कर आती है सिर्फ शिकायत ही नहीं दादू को खींचते हुए लाती है और मारने को कहती है। आज मेरी उसी गुड़िया का दूसरा जन्मदिन है समझ नहीं आ रहा है कि क्या दूँ उसे। खिलौने या कपड़े? कपड़ों से याद आया उसके पास 200 से भी ज्यादा कपडे होंगे फिर भी कोई भी बाहर जाता है तो उसके लिए कपडे ज़रूर लेकर आता है। जिसको लेकर उसकी मम्मी हमेशा नाराज़ हो जाती है। हो भी क्यों न नए कपड़ों के चक्कर में पुराना रह जाता है। इस बार भी उसकी छोटी बुआ ऐसा ही कुछ लेगी कपडे और खिलौने तो पक्का ही लेगी। हां उसकी मम्मी की डांट भी मिलेगी पर ले लेगी। आखिर घर की रौनक का दूसरा जन्मदिन जो है।

मुंबई की एक शाम - 2

कमरे में जाकर काया सोचने लगी कि आखिर उसकी नन्ही सी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई उसको पता ही नहीं चला। किया का दिया यह सप्राइज़ उसको सबसे खास और याद...

शायद ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।